किडनी फेल्योर क्या है?

Kidney Failure

किडनी फेल्योर क्या है?

हमारी किडनी शरीर में संतुलन बने रखने के कई कार्यों का निष्पादन करती हैं। वे अपशिष्ट उत्पादों को फिल्टर करके पेशाब से बहार निकालते हैं एवं निष्कासन करते हैं वे शरीर में पानी की मात्रा, सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम की मात्रा (इलेक्ट्रोलाइट्स) को संतुलित करते हैं। वह अतिरिक्त अम्ल एवं क्षार निकालने में मदद करते हैं जिससे शरीर में रसिद एवं क्षार का संतुलन बना रहता है। शरीर में किडनी का मुख्य कार्य सुन का शुद्धिकरण करना है जब बीमारी के कारण दोनों किडनी अपना सामान्य कार्य नहीं कर सके, तो किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है। जिसे हम किडनी फेल्योर कहते हैं।

किडनी फेल्योर के मुख्य प्रकार।

एक्यूट किडनी फेल्योर

एक्यूट किडनी फेल्योर में सामान्य रूप से काम करती दोनों किडनी विभिन्न रोगों के कारण नुकसान होने के बाद अल्प अवधि में ही काम करना कम या बंद कर देती है। यदि इस रोग का तुरन्त उचित उपचार किया जाए तो थोड़े समय में ही किडनी संपूर्ण रूप से पुनः काम करने लगती है और बाद में मरीज को दवाई या परहेज की बिल्कुल जरूरत नहीं रहती ।

एक्यूट किडनी फेल्योर के सभी मरीजों का उपचार दवा और परहेज द्वारा किया जाता है। कुछ मरीजों में अल्प अवधि (कुछ दिन के लिए ) डायलिसिस की आवश्यकता होती है।

एक्यूट किडनी फेल्योर होने के क्या कारण हैं?

एक्यूट किडनी फेल्योर होने के मुख्य कारण निम्नलिखित है:

  • बहुत ज्यादा दत्त और उल्टी होने के कारण शरीर में पानी की मात्रा में कमी एवं खून के दबाव का कम होना ।
  • गंभीर संक्रमण, गंभीर बीमारी या एक बड़ी शल्य चिकित्सा के बाद |
  • पथरी के कारण मूत्रमार्ग में अवरोध होना।
  • G6PD Deficiency का होना। इस रोग में खून के रक्तकण कई दवाओं के प्रयोग से टूटने लगते हैं, जिससे किडनी उचानक फेल हो सकती है।

इसके अलावा फेल्सीफेरम मलेरिया और लैप्टोस्पाइरोसिस, खून में गंभीर संक्रमण, किडनी में गंभीर संक्रमण, किडनी में विशेष प्रकार की सूजन, स्त्रियों में प्रसव के समय खून के अत्यधिक दबाव का होना या ज्यादा खून का बह जाना, दवा का विपरीत असर होना, साँप का डसना, स्नायु पर अधिक दबाव से उत्पन्न जहरीले पदार्थों का किडनी पर गंभीर असर होना इत्यादि एक्यूट किडनी फेल्योर के कारण हैं।

एक्यूट किडनी फेल्योर के लक्षण

एक्यूट किडनी फेल्योर में किडनी की कार्यक्षमता में अचानक रुकावट होने से अपशिष्ट उत्पादकों का शरीर में तेजी से संचय होता है एवं पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन में गड़बड़ी हो जाती है। इन कारणों से रोगी में किडनी की खराबी के लक्षण तेजी से विकसित होते है। ये लक्षण अलग-अलग मरीजों में विभिन्न प्रकार के कम या ज्यादा मात्रा में हो सकते हैं।

  • भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी होना, हिचकी आना।
  • पेशाब कम होना या बंद हो जाना ।
  • चेहरे पैर और शरीर में सूजन होना, साँस फूलना, ब्लडप्रेशर का बढ़ जाना ।
  • दस्त-उलटी, अत्यधिक रख्तस्त्राव, खून की छनी तेज बुखार आदि किडनी फेल्योर के कारण भी हो सकते हैं।
  • उच्च रक्तचाप से सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द शरीर में ऐंठन या झटके खून की उलटी और असामान्य दिल की धड़कन एवं कोमा जैसे गंभीर और जानलेवा लक्षण भी किडनी की विफलता के कारण बन सकता हैं।
  • कुछ रोगियों में किडनी की विफलता के प्रारंभिक चरण में किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं दिखाई पड़ते हैं। बीमारी का पता संयोग से चलता है जब अन्य कारणों के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है ।
  • कमजोरी महसूस होना, उनीदा होना, स्मरणशक्ति कम हो जाना, शरीर में ऐंठन होना इत्यादि ।
  • खून की उल्टी होना और खून में पोटैशियम की मात्रा में वृद्धि होना ( जिसके कारण अचानक हृदय की गति बंद हो सकती हैं) ।

किडनी फेल्योर के लक्षणों के अलावा जिन कारणों से किडनी खराब हुई हो उस रोग के लक्षण भी मरीज में दिखाई देते हैं, जैसे जहरी मलेरिया में ठंड के साथ बुखार आना ।

क्रोनिक किडनी फेल्योर

क्रोनिक किडनी फेल्योर (क्रोनिक किडनी डिसीज CKD) में अनेक प्रकार के रोगों के कारण, किडनी की कार्यक्षमता क्रमशः महीनों या वर्षों में कम होने लगती है और दोनों किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है। वर्तमान चिकित्सा विज्ञान में क्रोनिक किडनी फेल्योर को ठीक या संपूर्ण नियंत्रण करने को कोई दया उपलब्ध नहीं है। क्रोनिक किडनी फेल्योर के सभी नरीजों का उपचार दवा परहेज और नियमित परीक्षण द्वारा किया जाता है। शुरू में उपचार का हेतु कमजोर किडनी की कार्यक्षमता को बचाए रखना, किडनी फेल्योर के लक्षणों को काबू में रखना और संभावित खतरों की रोकथाम करना है। इस उपचार का उद्देश्य मरीज के स्वास्थ्य को संतोषजनक रखते हुए, डायलिसिस की अवस्था को यथासंभव टालना है। किडनी ज्यादा खराब होने पर सही उपचार के बावजूद रोग के लक्षण बढ़ते हैं और खून की जाँच में क्रिएटिनिन और यूरिया की मात्रा अधिक बढ़ जाती है, ऐसे मरीजों में सफल उपचार के विकल्प सिर्फ डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपन है।

क्या किडनी खराब होने से किडनी फेल्योर हो सकता है?

यदि किसी व्यक्ति को दोनों स्वस्थ किडनी में से एक किडनी खराब हो गई हो या उसे शरीर से किसी कारणवश निकाल दिया गया हो, तो भी दूसरी किडनी अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाते हुए शरीर का कार्य पूर्ण रूप से कर सकती है।

किडनी फेल्योर का निदान कैसे होता है?

खून में क्रिएटिनिन और यूरिया की मात्रा की जाँच से किडनी की कार्यक्षमता की जानकारी मिलती है। चूंकि किडनी की कार्यक्षमता शरीर की आवश्यकता से अधिक होती है इसलिये यदि किडनी को बीमारी से थोड़ा नुकसान हो जाए, तो भी खून के परीक्षण में कोई त्रुटि देखने को नहीं मिलती है परन्तु जब रोगों के कारण दोनों किडनी 50 प्रतिशत से अधिक खराब हो गई हो, तभी खून में क्रिएटिनिन और यूरिया की मात्रा सामान्य से अधिक पाई जाती है।

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